1.जजों की नियुक्ति के नए कानून पर प्रतिबद्धता से इन्कार:- सरकार ने जजों की नियुक्ति के लिए किसी नए कानून पर प्रतिबद्धता से इन्कार किया है। सरकार की ओर से लाए गए न्यायिक नियुक्ति आयोग कानून को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्य सभा में कहा, ‘सरकार ने न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम 2014 पर फैसले को स्वीकार कर लिया है। कई बार सवाल पूछा जाता है कि क्या हम फिर इस दिशा में कोई कानून लाने वाले हैं। राजनीति इस बात का फैसला करेगी। मैं आज की तारीख में इसको लेकर कोई वादा नहीं कर सकता।’ मंत्री ने अपनी बात के समर्थन में जीएसटी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जीएसटी पर सहमति बनाने के लिए सरकार को कई कदम उठाने पड़े। सुप्रीम कोर्ट ने कोलेजियम व्यवस्था को बेहतर करने के लिए सुझाव मांगे हैं। सरकार ने इस मामले में अपना सुझाव दे दिया है। इधर, कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ल ने राज्य सभा में यह मांग की कि संसद सर्वोच्च है और सरकार को डरने के बजाय न्यायपालिका में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दोबारा यह बिल लाना चाहिए। राजीव शुक्ल ने कहा कि अमेरिका सहित कहीं भी जजों की नियुक्ति जज नहीं करते। अमेरिका में जज की नियुक्ति सीनेट के जरिए होती है। जबकि हमारे यहां मौजूदा कोलिजियम सिस्टम में काफी खामियां हैं। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में खामियों को लेकर जज चिंता जाहिर करते हैं पर हकीकत यह है कि शीर्ष न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति जज ही करते हैं। इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं होती।