संसद में पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकार
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संसद सदस्यों को सम्बंधित मंत्रियों के विशेष विचाराधिकार में आने वाले सार्वजानिक महत्व के मामलों के बारे में सूचना प्राप्त करने के लिए प्रश्न पूछने का अधिकार होता है। सदन के किसी सदस्य को सदन में प्रश्न पूछने के लिए इस आशय की सूचना पहले से ही देना होता है। सामान्य दशा में प्रश्न पूछने के लिए एसी सूचना देने की निर्धारित न्यूनतम अवधि 10 दिन है। ये प्रश्न चार प्रकार के होते हैं -
1. तारांकित प्रश्न
2. अतारांकित प्रश्न
3. अल्प सूचना प्रश्न
4. गैर-सरकारी सदस्यों से पूछे जाने वाले प्रश्न
तारांकित प्रश्न
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तारांकित प्रश्न वह होता है जिसका उत्तर सम्बंधित मंत्री को प्रश्न पूछने वाले सदस्य को मौखिक रूप से देना होता है। चूँकि ऐसे प्रश्न को तारे के चिन्ह द्वारा विशेषांकित किया जाता है इसलिए इसे तारांकित प्रश्न कहते हैं। ऐसे प्रश्न के उत्तर के बाद सदस्यों द्वारा पूरक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
अतारांकित प्रश्न
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अतारांकित प्रश्न वह होता है जिसका उत्तर सम्बंधित मंत्री को लिखित रूप से देना होता है और यह उत्तर मंत्री द्वारा सदन पटल पर रखा गया माना जाता है। अत: सदन में इसका मौखिक उत्तर नहीं देना होता। ऐसे प्रश्न पर कोई पूरक प्रश्न नहीं पूछा जा सकता।
अल्प सूचना प्रश्न
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यदि सदन का कोई सदस्य किसी लोक महत्व के और अविलंबनीय मामले पर मौखिक उत्तर चाहता है तो वह इसके लिए 10 दिन से कम समय में भी सूचना दे सकता है। एसा प्रश्न "अल्प-सूचना प्रश्न" कहा जाता है।
अल्प सूचना प्रश्न के साथ प्रश्न पूछे जाने के संक्षिप्त कारण अनिवार्य रूप से बताना होता है। यदि ऐसे कारण नहीं बताये जाते तो वहां वह सूचना सदस्य को लौटा दी जाती है। कारण में केवल यह कथन कर देना की मामला "व्यापक लोक महत्त्व" या "लोक हित" का है, इस प्रयोजन के लिए पर्याप्त नहीं समझा जाता।
जब सदन का अध्यक्ष इस बात से संतुष्ट हो की अल्प सूचना प्रश्न की विषय-वस्तु अविलंबनीय है तब वह सम्बंधित मंत्री से उसका उत्तर देने के लिए एसी तारीख जो उस मंत्री और प्रश्न पूछने वाले सदस्य को सुविधाजनक हो, नियत की जाती है।
गैर-सरकारी सदस्यों से पूछे जाने वाले प्रश्न
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कोई प्रश्न किसी गैर-सरकारी सदस्य को भी संबोधित किया जा सकता है, परन्तु यह तब होता है जब उस प्रश्न की विषय-वस्तु किसी विधेयेक, संकल्प, अथवा सदन के कार्य से सम्बंधित किसी ऐसे अन्य मामले, जिसके लिए वह सदस्य उत्तरदायी है, से सम्बन्ध रखती है।
प्रश्न पूछने की सूचना
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किसी सदस्य को प्रश्न पूछने के लिए न्यूनतम पूरे 10 दिन की पूर्व सूचना देनी होती है। सूचना देने की अधिकतम अवधि 21 दिन विहित है। प्रश्नों की सूचना इस हेतु एक निर्धारित प्रपत्र में सदन के महासचिव को संबोधित करके दी जाती है।
इसके अतिरिक्त प्रश्न की सूचना में प्रश्न की विषय-वस्तु के साथ जिस मंत्री को प्रश्न संबोधित है उसका पदनाम और जिस तिथि को प्रश्न, उत्तर के लिए प्रश्न सूची में रखवाने का विचार हो उसका भी स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए।
कोई सदस्य किसी एक दिन-विशेष के लिए जितने चाहे उतने प्रश्नों की सूचनाएं दे सकता है, लेकिन किसी एक दिन के लिए उसके तारांकित और अतारांकित दोनों प्रश्नों को मिलाकर प्रश्न-सूचियों में उसके नाम से रखे जाने वाले प्रश्नों की कुल संख्या पांच से अधिक नहीं हो सकती।
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संसद सदस्यों को सम्बंधित मंत्रियों के विशेष विचाराधिकार में आने वाले सार्वजानिक महत्व के मामलों के बारे में सूचना प्राप्त करने के लिए प्रश्न पूछने का अधिकार होता है। सदन के किसी सदस्य को सदन में प्रश्न पूछने के लिए इस आशय की सूचना पहले से ही देना होता है। सामान्य दशा में प्रश्न पूछने के लिए एसी सूचना देने की निर्धारित न्यूनतम अवधि 10 दिन है। ये प्रश्न चार प्रकार के होते हैं -
1. तारांकित प्रश्न
2. अतारांकित प्रश्न
3. अल्प सूचना प्रश्न
4. गैर-सरकारी सदस्यों से पूछे जाने वाले प्रश्न
तारांकित प्रश्न
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तारांकित प्रश्न वह होता है जिसका उत्तर सम्बंधित मंत्री को प्रश्न पूछने वाले सदस्य को मौखिक रूप से देना होता है। चूँकि ऐसे प्रश्न को तारे के चिन्ह द्वारा विशेषांकित किया जाता है इसलिए इसे तारांकित प्रश्न कहते हैं। ऐसे प्रश्न के उत्तर के बाद सदस्यों द्वारा पूरक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
अतारांकित प्रश्न
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अतारांकित प्रश्न वह होता है जिसका उत्तर सम्बंधित मंत्री को लिखित रूप से देना होता है और यह उत्तर मंत्री द्वारा सदन पटल पर रखा गया माना जाता है। अत: सदन में इसका मौखिक उत्तर नहीं देना होता। ऐसे प्रश्न पर कोई पूरक प्रश्न नहीं पूछा जा सकता।
अल्प सूचना प्रश्न
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यदि सदन का कोई सदस्य किसी लोक महत्व के और अविलंबनीय मामले पर मौखिक उत्तर चाहता है तो वह इसके लिए 10 दिन से कम समय में भी सूचना दे सकता है। एसा प्रश्न "अल्प-सूचना प्रश्न" कहा जाता है।
अल्प सूचना प्रश्न के साथ प्रश्न पूछे जाने के संक्षिप्त कारण अनिवार्य रूप से बताना होता है। यदि ऐसे कारण नहीं बताये जाते तो वहां वह सूचना सदस्य को लौटा दी जाती है। कारण में केवल यह कथन कर देना की मामला "व्यापक लोक महत्त्व" या "लोक हित" का है, इस प्रयोजन के लिए पर्याप्त नहीं समझा जाता।
जब सदन का अध्यक्ष इस बात से संतुष्ट हो की अल्प सूचना प्रश्न की विषय-वस्तु अविलंबनीय है तब वह सम्बंधित मंत्री से उसका उत्तर देने के लिए एसी तारीख जो उस मंत्री और प्रश्न पूछने वाले सदस्य को सुविधाजनक हो, नियत की जाती है।
गैर-सरकारी सदस्यों से पूछे जाने वाले प्रश्न
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कोई प्रश्न किसी गैर-सरकारी सदस्य को भी संबोधित किया जा सकता है, परन्तु यह तब होता है जब उस प्रश्न की विषय-वस्तु किसी विधेयेक, संकल्प, अथवा सदन के कार्य से सम्बंधित किसी ऐसे अन्य मामले, जिसके लिए वह सदस्य उत्तरदायी है, से सम्बन्ध रखती है।
प्रश्न पूछने की सूचना
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किसी सदस्य को प्रश्न पूछने के लिए न्यूनतम पूरे 10 दिन की पूर्व सूचना देनी होती है। सूचना देने की अधिकतम अवधि 21 दिन विहित है। प्रश्नों की सूचना इस हेतु एक निर्धारित प्रपत्र में सदन के महासचिव को संबोधित करके दी जाती है।
इसके अतिरिक्त प्रश्न की सूचना में प्रश्न की विषय-वस्तु के साथ जिस मंत्री को प्रश्न संबोधित है उसका पदनाम और जिस तिथि को प्रश्न, उत्तर के लिए प्रश्न सूची में रखवाने का विचार हो उसका भी स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए।
कोई सदस्य किसी एक दिन-विशेष के लिए जितने चाहे उतने प्रश्नों की सूचनाएं दे सकता है, लेकिन किसी एक दिन के लिए उसके तारांकित और अतारांकित दोनों प्रश्नों को मिलाकर प्रश्न-सूचियों में उसके नाम से रखे जाने वाले प्रश्नों की कुल संख्या पांच से अधिक नहीं हो सकती।