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सामान्य अध्ययन, [11.08.16 08:50]
11 August 2016(Thursday) के समाचारपत्रों से परीक्षोपयोगी सामग्री

1.कुडनकुलम संयंत्र-1 राष्ट्र को समर्पित

• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने कुडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्र की पहली यूनिट संयुक्त रूप से बुधवार को राष्ट्र को समर्पित की। इस मौके पर दोनों नेताओं ने इसे खास और विशेषाधिकार प्राप्त भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की बेहतरीन मिसाल करार दिया।
• इस यूनिट की क्षमता 1000 मेगावाट की है। नई दिल्ली से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए मोदी ने कहा कि भारत-रूस परियोजना कुडनकुलम-1 भारत में स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ाने के प्रयासों में महत्वपूर्ण कदम है। इसकी पांच यूनिट और बनाए जाने की योजना है।
• उधर, मॉस्को से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े पुतिन ने कहा कि यूनिट का निर्माण उच्च सुरक्षा मानकों को अपनाते हुए सबसे आधुनिक रूसी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके किया गया है, जबकि मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत परमाणु ऊर्जा उत्पादन के महत्वाकांक्षी एजेंडा को आगे बढ़ने को प्रतिबद्ध है।
• प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘कुडनकुलम सयंत्र-1 को राष्ट्र को समर्पित किया जाना भारत-रूस संबंधों के संदर्भ में एक और ऐतिहासिक कदम है। इसका सफलतापूर्वक पूरा होना हमारे खास और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की मजबूती का एक और सुंदर उदाहरण है। यह हमारी गहरी दोस्ती का जश्न भी है।
•  यह इस क्षेत्र में हमारे सहयोग की शुरुआत भर है।’ तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता भी चेन्नई से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए इस कार्यक्र म में जुड़ीं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘कुडनकुलम में ही पांच और यूनिट स्थापित करने की योजना है।

2. ब्राजील की पहली महिला राष्ट्रपति पर 25 अगस्त से चलेगा महाभियोग

• ब्राजील की पहली महिला राष्ट्रपति दिल्मा रूसेफ के खिलाफ महाभियोग का रास्ता बुधवार को साफ हो गया। सीनेट ने उन्हें दोषी करार देते हुए 21 के मुकाबले 59 वोटों से इसे मंजूरी दे दी। बैठक की अध्यक्षता चीफ जस्टिस रिकार्डो लिवानदोवस्की ने की।
• रूसेफ अभी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में निलंबित हैं। निलंबित होने वाली भी वे पहली राष्ट्रपति हैं। रूसेफ पर महाभियोग की कार्रवाई रियो में ओलिंपिक खेलों के समापन के चार दिन बाद 25 अगस्त से शुरू होगी। उसके पांच दिन में पूरा हो जाने की उम्मीद है।
•  रूसेफ के खिलाफ महाभियोग को मंजूरी के लिए सीनेट में 81 वोटों की जरूरत होगी जो आसानी से मिलने की उम्मीद है। महाभियोग द्वारा हटाई जाने वाली भी रूसेफ ब्राजील की पहली राष्ट्रपति होंगी। उन पर महाभियोग का मामला ऐसे समय चल रहा है, जब देश में दुनियाभर के खिलाड़ी ओलिंपिक खेलने आए हैं।
• उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की कार्रवाई संसद के निचले सदन में पिछले साल दिसंबर में शुरू की गई थी। वहां से इसे मंजूर किए जाने के बाद सीनेट भेजा गया था।

3. कारखाना संशोधन विधेयक लोस से मंजूर : श्रमिकों की ओवरटाइम की अवधि 50 से बढ़ाकर 100 घंटे करने का प्रावधान

• निर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन और उद्योगों की सहूलियत के उद्देश्य से कारखाना मजदूरों के ओवरटाइम के घंटे तिमाही दोगुने करके 100 करने संबंधी विधेयक ‘फैक्ट्रीज (अमेंडमेंट) बिल, 2016’ को लोकसभा ने बुधवार को मंजूरी दे दी। हालांकि कांग्रेस, वामदलों, तृणमूल कांग्रेस, जनता दल (यू) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने विधेयक का विरोध किया। विपक्ष ने विधेयक को कारपोरेट के हित में, श्रमिक विरोधी और राज्यों  के अधिकारों का अतिक्रमण करने वाला करार दिया।
•  विधेयक पेश करते हुए श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि कानून में संशोधन से श्रमिकों को ‘ज्यादा  काम करके ज्यादा कमाने’ का मौका मिलेगा। उन्होंने बताया कि ओवरटाइम समेत एक दिन में काम के घंटे 10 से ज्यादा और एक हफ्ते में 60 से ज्यादा नहीं होंगे। ये संशोधन किसी भी तरह अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के मानकों का उल्लंघन नहीं करते। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने ओवरटाइम की उच्चतम सीमा 144 घंटे तय की है।
• श्रम मंत्री ने स्पष्ट किया कि ओवरटाइम के घंटों में वृद्धि बाध्यकारी नहीं है। यह श्रमिक का अपना फैसला होगा। यह सिर्फ दोगुना मेहनताना पाने का एक अवसर है। अन्य परिवर्तनों के साथ विधेयक में ओवरटाइम के घंटे जनहित में तिमाही 125 तक बढ़ाने की अनुमति प्रदान की गई है। साथ ही केंद्र और राज्य  सरकारों को ओवरटाइम घंटों से संबंधित नियमों में छूट देने का अधिकार दिया गया है।
• सदस्यों ने जानना चाहा कि इस विधेयक को लाने की जल्दबाजी क्या थी, जबकि इस संबंध में व्यापक विधेयक सदन के समक्ष लंबित है, इस पर श्रम मंत्री ने कहा कि यह समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी पहल की हैं, जिसके लिए बड़ी संख्या में श्रमिकों की जरूरत पड़ेगी।
• माकपा के शंकर प्रसाद दत्ता ने कहा कि

सामान्य अध्ययन, [11.08.16 08:51]
मोदी सरकार गुप्त एजेंडे के तहत श्रम कानूनों पर प्रहार कर रही है। राज्य  सरकारों के अधिकारों का अतिक्रमण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश के कारपोरेट वर्ग और बड़े औद्योगिक घरानों के साथ-साथ अडानी और अंबानी को खुश करने के लिए लाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक भी श्रम संगठन इस विधेयक के पक्ष में नहीं है। बीजद के रविन्द्र कुमार जेना ने कहा कि ओवरटाइम के घंटों में वृद्धि से महिलाओं में अल्कोहल व तंबाकू का उपभोग बढ़ेगा और उनमें मोटापे व तनाव में भी वृद्धि होगी।
• यह बाद में बड़ी सामाजिक समस्या में तब्दील हो सकती है। हालांकि, बाद में कांग्रेस और वामदलों के सदन से बहिर्गमन के बाद विधेयक को लोकसभा ने पारित कर दिया।

4. लोकसभा में कराधान विधि संशोधन विधेयक पेश

• लोकसभा में बुधवार को आयकर अधिनियम 1961 और सीमाशुल्क अधिनियम 1975 में और संशोधन करने वाला एक विधेयक पेश किया गया। इसमें किसी पूर्ववर्ती सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी का पुनर्गठन करने या उसे अलग कंपनियों के रूप में विभाजित करने को ‘‘विभाजन’ की परिभाषा के दायरे में लाने का प्रावधान किया गया है।
• निचले सदन में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कराधान विधि संशोधन विधेयक 2016 पेश किया। विधेयक के कारणों एवं उद्देश्यों में कहा गया है कि किसी पूर्ववर्ती सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी का पुनर्गठन करने या उसे अलग कंपनियों के रूप में विभाजित करने और सरकार से शेयरों का हस्तांतरण करने की शतरे को प्रभाव में लाने के लिए इस तरह के पुनर्गठन या अलग कंपनियों के रूप में विभाजित करने को ‘‘विभाजन’ की परिभाषा के दायरे में लाने की जरूरत है।
• इसके तहत आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 जेजेएए को वित्त अधिनियम 2016 से बदला गया। इसमें परिधान निर्माण कारोबार की मौसमी प्रकृति को देखते हुए कर्मचारियों की कार्यावधि से जुड़े विषय भी शामिल हैं।
• इसमें कहा गया है कि अभी मार्बल ब्लाक, ग्रेनाइट ब्लाक, स्लैब गैर तटकर या शुल्क व्यवस्था के तहत आते हैं जो सीमाशुल्क अधिनियम 1975 की पहली अनुसूची के तहत 10 प्रतिशत की दर से सीमा शुल्क से संबंधित है। इसमें तटकर या शुल्क को लचीला बनाने के लिए विधेयक में व्यवस्था की गई है और इसे डब्ल्यूटीओ से जुड़ी दर के अनुरूप बनाने की बात कही गई है।

5. 36 विदेशी कंपनियों को भारत में रक्षा उत्पादन की मंजूरी

• भारत सरकार ने 36 विदेशी रक्षा कंपनियों को भारत में प्रोडक्शन यूनिट लगाने की मंजूरी अब तक दी है। ये कम्पनियां एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) या फिर भारतीय कम्पनी के साथ ज्वाइंट वेन्चर के तहत रक्षा उपकरणों और सैन्य साजोसामान का उत्पादन करेंगी। खास बात यह है कि इनमें से सर्वाधिक 12 विदेशी कम्पनियां कर्नाटक राज्य में और नौ महाराष्ट्र में अपनी-अपनी यूनिट्स लगाने जा रही हैं।
• रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारत सरकार की नई रक्षा पालिसी जारी होने के बाद विदेशी कम्पनियों ने भारत में अपनी इकाइयां स्थापित करने में खास रुचि दिखाई है। उनके आवेदन पर जांचोपरान्त पिछले माह तक छत्तीस कम्पनियों को सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।
• इनमें से 12 प्रपोजल कर्नाटक राज्य में लगाने के लिए, नौ महाराष्ट्र, पांच नई दिल्ली, चार तेलंगाना, तीन तमिलनाडु और एक-एक हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश में लगाने के लिए प्राप्त हुए हैं। इधर, अनिल अंबानी का रिलायंस ग्रुप विदेशी रक्षा कम्पनी के साथ मिलकर यहां डिफेंस प्रोजेक्ट्स पर काम करने जा रहा है।
• दरअसल, कम्पनी के मालिक अनिल अंबानी रिलायंस को बड़ी डिफेंस कम्पनी के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं। कम्पनी के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रिलायंस अभी तक 84 हजार करोड़ Rs की डिफेंस बिडिंग में हिस्सा ले चुकी है। हालांकि, अभी तक एक भी प्रोजेक्ट हासिल नहीं कर पायी है।
• रिलायंस डिफेंस के चीफ एग्जीक्युटिव आरके ढींगरा ने कहा कि हम भारत सरकार के ‘‘मेक इन इंडिया’ कान्ट्रैक्ट में अहम हिस्सेदारी उम्मीद रखते हैं। उन्होंने कहा कि डिफेंस सेक्टर में कम्पनी कुछ सालों में बड़े प्लेयर के तौर पर सामने आएगी। रिलायंस इस्रइल की एक कम्पनी के साथ मिलकर भारत में ज्वांइट वेंचर बना रही है। उसके साथ मिसाइल, डिफेंस सिस्टम और एडवांस हेलीकाप्टर बनाने की कोशिश में है। वेंचर की शुरुआती कैपिटल पूंजी 13 हजार करोड़ Rs होगी।
• कम्पनी में रिलायंस की हिस्सेदारी 51 फीसद और विदेशी कम्पनी की हिस्सेदारी 49 फीसद होगी। नया वेंचर मध्य प्रदेश के इंदौर में धीरूभाई अंबानी लैंड सिस्टम्स पार्क में शुरू होगा।

6. ई-गवर्नेस के बगैर संशोधित मोटर बिल का लाभ मुश्किल

• परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2016 में सारा फोकस जुर्माना बढ़ाने पर है। जबकि कार्यान्वयन को लेकर स्थिति अस्पष्ट है। जब तक कार्यान्वयन सुनिश्चित नहीं होता है और जानबूझकर लापरवाही वाले यातायात उल्

सामान्य अध्ययन, [11.08.16 08:51]
लंघनों से होने वाली मौतों के मामले में मोटर एक्ट के अलावा आइपीसी के प्रावधान भी लागू करने की व्यवस्था नहीं होती, तब तक सड़क हादसों पर अंकुश लगना मुश्किल है।
• परिवहन विशेषज्ञों को खासकर दो बातों पर विशेष आपत्ति है। पहली, विधेयक में ई-गवर्नेस की बात तो कही गई है, लेकिन कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है। कहने को तो वाहन और सारथी पोर्टल चालू हो गए हैं। लेकिन अभी तक पूरे देश में इनका इस्तेमाल शुरू नहीं हुआ है। जहां हुआ भी है वहां अनेक खामियां हैं। परिणामस्वरूप अधिकांश आरटीओ में आरसी व डीएल बनाने में दलालों का धंधा बदस्तूर जारी है।
•  इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग के संयोजक एसपी सिंह के मुताबिक, महज कानून बदलने से हालात सुधरने वाले नहीं हैं। मोटर एक्ट में पहले भी कई बार संशोधन हो चुके हैं। इसके बावजूद हादसे घटने की जगह बढ़ गए हैं। ओवरलोडिंग के खिलाफ पहले से काफी सख्त नियम बने हुए हैं। यदि इनका पालन होता तो ओवरलोडिंग की समस्या खत्म हो गई होती। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। अभी भी केवल टोल वसूल कर ट्रकों को छोड़ दिया जाता है।
• नियमानुसार ओवरलोडेड ट्रकों का सारा अतिरिक्त माल ट्रांसपोर्टर के ही खर्चे और जोखिम पर टोल प्लाजा पर ही उतार लिया जाना चाहिए। इसलिए जब तक ओवरलोडेड और ओवरसाइज ट्रक चलाने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस और उन्हें चलवाने वाले बिचौलियों के परमिट रद नहीं किए जाते, तब तक हादसों को न्यौता देने वाली इस बुराई का अंत संभव नहीं है। इसके लिए यातायात अनुपालन व्यवस्था को मानवीय हस्तक्षेप की संभावनाओं को खत्म या न्यूनतम करना पड़ेगा।
• यह सभी टोल प्लाजाओं पर इलेक्ट्रानिक टोलिंग लागू करने व सभी वाहनों पर फास्टैग लगवाने के अलावा आरसी व डीएल जारी करने की ऑनलाइन व्यवस्था को दुरुस्त कर तथा देश की सभी प्रमुख सड़कों पर चौराहों/नाकों पर इंटीग्रेटेड सीसीटीवी लगाकर ही संभव हो सकता है। दूसरा अहम मुद्दा वाहन चालकों की नीयत और वाहन चलाने में की जाने वाली लापरवाही का है। यदि कोई व्यक्ति शराब पीकर अथवा मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाता है या ओवरलोडेड या ओवरसाइज वाहन लेकर सड़क पर उतरता है तो इसका साफ मतलब है कि वह जानबूझकर दुर्घटना की स्थितियां पैदा कर रहा है।
• ऐसी स्थितियां जिनसे किसी की जान भी जा सकती है। ऐसे में उस व्यक्ति पर केवल जुर्माना लगाना या लाइसेंस निलंबित करना पर्याप्त नहीं है। उस पर तो आपराधिक दंड संहिता के प्रावधान भी लागू होने चाहिए। क्योंकि केवल मोटर एक्ट का दंड लोगों में कानून का भय पैदा करने में नाकाम साबित हुआ है।

7. एनबीएफसी के एफडीआइ नियम उदार

• देश के गैर बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र (एनबीएफसी) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) का प्रवाह बढ़ाने को इस क्षेत्र का दायरा बढ़ा दिया है। सरकार ने एफडीआइ के नियमों को उदार बनाते हुए ऑटोमेटिक मंजूरी के दायरे में आने वाली अन्य वित्तीय सेवाएं देने वाली एनबीएफसी को भी शामिल कर लिया है। लेकिन इन कंपनियों में एफडीआइ की ऑटोमेटिक मंजूरी का नियम तभी लागू होगा जब वे कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक अथवा सेबी जैसे नियामकों के दायरे में आती हों।
• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। मौजूदा नियमों में केवल 18 विशिष्ट प्रकार की सेवाएं देने वाली एनबीएफसी में ही एफडीआइ के लिए ऑटोमेटिक मंजूरी की अनुमति थी। बाकी अन्य वित्तीय सेवाओं की श्रेणी में आने वाली कंपनियों को एफडीआइ के लिए पहले मंजूरी लेनी होती थी।
• वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2016-17 के बजट में अन्य वित्तीय सेवाएं देने वाली गैर बैंकिंग कंपनियों के लिए भी एफडीआइ नियमों को उदार बनाने का एलान किया था। नवंबर 2015 के बाद एफडीआइ नियमों को सरल बनाने के क्रम में यह तीसरा बड़ा फैसला है। इसी साल जून में सरकार ने रक्षा और नागरिक उड्डयन समेत आठ क्षेत्रों के लिए एफडीआइ के नियमों को आसान बनाने का फैसला किया था।
• एफडीआइ नियमों को उदार बनाने की दिशा में सरकार ने न्यूनतम पूंजी की शर्तो को हटा लिया है क्योंकि अधिकांश नियामक इसके लिए खुद नियम तय कर चुके हैं। सरकार के इस फैसले से न केवल देश में एफडीआइ का प्रवाह बढ़ेगा बल्कि इससे आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार भी बढ़ेगी।
• सरकार के बयान के मुताबिक इसका असर पूरे देश पर होगा और किसी राज्य  या जिले तक सीमित नहीं रहेगा। वर्तमान में 18 प्रकार की वित्तीय सेवाएं देने वाली एनबीएफसी में सौ फीसद एफडीआइ ऑटोमेटिक मंजूरी के तहत आता है।

8. नासा ने मंगल पर मानव बस्तियों के लिए बढ़ाए कदम

• नासा ने मंगल ग्रह पर मानव बस्तियां बसाने की कल्पना को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। नासा ने प्रोटोटाइप बस्तियां विकसित करने में मदद के लिए छह कंपनियों का चुनाव किया है।
• नासा के एडवांस्ड एक्सप्लोरेशन सिस्टम्स के निदेशक जेसन क्रूसन न

सामान्य अध्ययन, [11.08.16 08:51]
े कहा, ‘महत्वाकांक्षी अभियान के लिए सरकार और निजी क्षेत्र की क्षमता और अनुभव का उपयोग किया जा रहा है। हमने अब ऐसी अंतरिक्ष बस्तियों पर ध्यान केंद्रित किया है जहां पर इंसान महीनों और कई साल तक स्वतंत्र रूप से निवास और काम कर सकेंगे।’ इस काम के लिए जिन छह अमेरिकी कंपनियों को चुना गया है उनमें बिगेलो एयरोस्पेस, बोइंग, लॉकहीड मार्टिन, आर्बिटल एटीके, सिएरा नेवादा कापरेरेशन स्पेस सिस्टम्स और नैनोरॉक्स हैं।
• इनको प्रोटोटाइप बस्तियां विकसित करने और अंतरिक्ष बस्तियों की कल्पना के अध्ययन के लिए करीब 24 महीने का वक्त दिया गया है। नासा का अनुमान है कि इस पूरे काम पर 6.5 करोड़ डॉलर (करीब 434 करोड़ रुपये) खर्च आएगा। इन कंपनियों के लिए इस प्रस्तावित काम के कुल लागत का 30 फीसद योगदान करना आवश्यक किया गया है।

9. जीका विषाणु से मस्तिष्क विकार एवं माइक्रोसेफली होने का रहस्य खुला

• उम्दा सर्जरी एवं मेडिकल क्षेत्र में खोज के मामले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के वैज्ञानिकों का जवाब नहीं। अब एम्स में स्थित डॉ. बीआर अम्बेडकर जैव औषधीय शोध केंद्र एवं राष्ट्रीय मस्तिष्क शोध केंद्र ने संयुक्त रूप से जीका विषाणु द्वारा बच्चे के सिर के विकास को रोकने की विधि का रहस्य खोजा है। इसमें रेटिनोइक अम्ल की भागीदारी की ओर संकेत किया है।
• जीका विषाणु एक अनेक प्रकार से रोगजनक विषाणु है जो नवजात शिशुओं में कुरूपता और मुंड संकुचन जैसे रोगों को जन्म देता है। यह विषाणु कई मस्तिष्क संबंधी समस्याओं और गंभीर जन्म दोष उत्पन्न करता है। यह गर्भवती महिला से उसके भ्रूण में चला जाता है तथा यह तीव्र मस्तिष्क विकृतियों और माइक्रोसेफली पैदा कारक है इसलिए विश्व स्वस्य संगठन ने इस महामारी को ‘‘जन स्वास्य आपातकालीन अंतर्राष्ट्रीय चिंता’ घोषित किया है।
• अध्ययन फ्रंटियर्स इन ह्यूमन न्यूरोसाइंस में प्रकाशित हुआ है। एम्स के डा. आशुतोष, डा. मुनीब की अगुवाई में हुए अध्ययन में कई देशों को यह सलाह दी गई है कि जब तक इस बीमारी के निदान के कारण न ढूंढें जाएं तब तक गर्भधारण को टाल दिया जाये।
•  खोज में : जीका विषाणु द्वारा ग्रसित महिला के गर्भ में पल रहे भ्रूण में माइक्रोसेफली के उत्पन्न होने की संभावित विधि के बारे में बताया है। जीका विषाणु रेटिनोइक अम्ल के संकेतन के साथ हस्तक्षेप से भ्रूण के मस्तिष्क की कोशिकाओं के विकास में अपनी जीनोम अनुक्रम दोहराता है जिसे रेटिनोइक प्रत्युत्तर तत्व और सामान्यत: आरएआरई सहमति प्रत्युत्तर कहा जाता है।
• शोध में शामिल अन्य वैज्ञानिकों में डा. हिमांशु सिंह, डा. खुर्शीद और डा. सुब्रमण्यम दंतम ने बताया कि जीका विषाणु और माइक्रोसेफली के सम्बन्ध का सिद्धांत जीका विषाणु के पित्रैक समूह के अनुक्रमों तथा मनुष्य के डीएनए में प्रारंभिक तंत्रिका नाल के विकासात्मक तत्त्व संकेतक (रेटिनोइक अम्ल) की अनुक्रिया की समरूपता पर आधारित है।
• लाभ टीका बने : यह अध्ययन संभवत: शोध के नए क्षेत्र खोलता है और जीका विषाणु द्वारा उत्पन्न माइक्रोसेफली के खिलाफ निर्णायक सिद्ध हो सकता है। वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तुत विचारों निश्चित रूप से यह निष्कर्ष निकल जा सकता है कि जीका विषाणु के संक्रमण को रोकने के लिए अवश्य ही प्रभावी और उत्कृष्ट टीका बनाया जायेगा। यह अध्ययन माइक्रोसेफली को रोकने के लिए की गई पहल में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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