RENVAT MAYLA, [03.08.16 00:22]
RENVATA RAM MAYLA, [03.08.16 00:17]
भारतीय संविधान : 12 अनुसूचियाँ
1. प्रथम अनुसूची-
इसमें भारतीय संघ के घटक राज्यों (29 राज्य) एवं संघ शासित (7) क्षेत्रो का उल्लेख है।
Note : संविधान के 69वें संशोधन के द्वारा दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का दर्जा दिया गया है। 2.द्वितीय अनुसूची-
इस में भारतीय राज-व्यवस्था के विभिन्न पदाधिकारियों (राष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, राज्य सभा के सभापति एवं उपसभापति, विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति एवं उप सभापति, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायधीशों और भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक आदि) को प्राप्त होने वाले वेतन, भत्ते और पेंशन आदि का उल्लेख किया गया है। 3. तृतीय अनुसूची-
इसमे विभिन्न पदाधिकारियों (राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति मंत्री उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों) द्वारा पद ग्रहण के समय ली जाने वाली शपथ का उल्लेख है। 4. चतुर्थ अनुसूची-
इसमें विभिन्न राज्यों तथा संघीय क्षेत्रों की राज्य सभा में प्रतिनिधित्व का विवरण दिया गया है। 5. पाँचवी अनुसूची-
इसमें विभिन्न अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजाति के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में उल्लेख हैं। 6. छठी अनुसूची-
इसमें त्रिपुरा, असम, मेघालय और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में प्रावधान है। 7. सातवीं अनुसूची-
इस में केंद्र एवं राज्यो के बीच शक्तियों के बँटवारे के बारे में दिया गया है इसके अंतर्गत तीन सूचियाँ है-
संघ सूची, राज्य सूची एवं समवर्ती सूची।
(i). संघ सूची- इस सूची में दिए गए विषय पर केंद्र सरकार कानून बनाती है। संविधान के लागू होने के समय इसमें संख्या 97 विषय थे, वर्तमान समय में इसमें 98 विषय है।
(ii). राज्य सूची- इस सूची में दिए गए विषय पर राज्य सरकार कानून बनाती है। राष्ट्रीय हित से संबंधित होने पर केंद्र सरकार भी कानून बना सकती है। संविधान के लागू होने के समय इसके अंतर्गत 66 विषय थे, वर्तमान समय में इसमें 62 विषय है।
(iii). समवर्ती सूची- इसके अंतर्गत दिए गए विषय पर केंद्र एवं राज्य दोनों सरकारें कानून बना सकती है। परंतु कानून के विषय समान होने पर केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून ही मान्य होता है। राज्य सरकार द्वारा बनाया गया कानून केंद्र सरकार के कानून बनाने के साथ ही समाप्त हो जाता है। संविधान के लागू होने के समय समवर्ती सूची में 47 विषय थे, वर्तमान समय में इसने 52 विषय है।
Note : समवर्ती सूची का प्रावधान जम्मू कश्मीर राज्य के संबंध में नहीं है। 8. आठवीं अनुसूची-
इसमें भारत की 22 भाषाओं का उल्लेख किया गया है। मूलरुप से आठवीं अनुसूची में 14 भाषाएं थी। 1967 ई. में सिंधी को और 1992 ई. में कोंकणी, मणिपुरी तथा नेपाली को आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया। 2004 ई. में मैथिली संथाली, डोगरी एवं बोड़ों को आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया। 9. नौवीं अनुसूची-
संविधान में यह अनुसूची प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम 1951 ई. के द्वारा जोडी गई। इसके अंतर्गत राज्य द्वारा सम्पत्ति के अधिग्रहण की विधियों का उल्लेख किया गया है। इस अनुसूची में सम्मिलित विषयों को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है। वर्तमान में इस अनुसूची में 284 अधिनियम है।
Note : अब तक यह मान्यता थी की संविधान की नौंवीं अनुसूची में सम्मिलित कानूनों की न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती। 11 जनवरी, 2007 के संविधान पीठ के एक निर्णय द्वारा यह स्थापित किया गया है की नौवी अनुसूची में सम्मिलित किसी भी कानून को इस आधार पर चुनौती दी जा सकती है कि वह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है तथा उच्चतम न्यायालय इन कानूनों की समीक्षा कर सकता है। 10.दसवीं अनुसूची-
RENVAT MAYLA, [03.08.16 00:22]
RENVATA RAM MAYLA, [03.08.16 00:17]
यह संविधान में 52वें संशोधन, 1985 के द्वारा जोड़ी गई है। इसमें दल-बदल से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख है। 11. ग्यारहवीं अनुसूची-
यह अनुसूची में 73वे संवैधानिक संसोधन, 1993 के द्वारा जोडी गई है इसमे पंचायतीराज संस्थाओं को कार्य करने के लिए 29 विषय प्रदान किए गए हैं। 12. बाहरवीं अनुसूची-
यह अनुसूची संविधान में 74वे संवैधानिक संसोधन, 1993 के द्वारा जोडी गई है इसमें शहरी क्षेत्र की स्थानीय स्वशासन संस्थाओं (नगरपालिका) को कार्य करने के लिए 18 विषय प्रदान किए गए हैं।
RENVATA RAM MAYLA, [03.08.16 00:18]
भारतीय संविधान : अनुसूचियाँ 👍👍👍👍👍
RENVATA RAM MAYLA, [03.08.16 00:17]
भारतीय संविधान : 12 अनुसूचियाँ
1. प्रथम अनुसूची-
इसमें भारतीय संघ के घटक राज्यों (29 राज्य) एवं संघ शासित (7) क्षेत्रो का उल्लेख है।
Note : संविधान के 69वें संशोधन के द्वारा दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का दर्जा दिया गया है। 2.द्वितीय अनुसूची-
इस में भारतीय राज-व्यवस्था के विभिन्न पदाधिकारियों (राष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, राज्य सभा के सभापति एवं उपसभापति, विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति एवं उप सभापति, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायधीशों और भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक आदि) को प्राप्त होने वाले वेतन, भत्ते और पेंशन आदि का उल्लेख किया गया है। 3. तृतीय अनुसूची-
इसमे विभिन्न पदाधिकारियों (राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति मंत्री उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों) द्वारा पद ग्रहण के समय ली जाने वाली शपथ का उल्लेख है। 4. चतुर्थ अनुसूची-
इसमें विभिन्न राज्यों तथा संघीय क्षेत्रों की राज्य सभा में प्रतिनिधित्व का विवरण दिया गया है। 5. पाँचवी अनुसूची-
इसमें विभिन्न अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजाति के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में उल्लेख हैं। 6. छठी अनुसूची-
इसमें त्रिपुरा, असम, मेघालय और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में प्रावधान है। 7. सातवीं अनुसूची-
इस में केंद्र एवं राज्यो के बीच शक्तियों के बँटवारे के बारे में दिया गया है इसके अंतर्गत तीन सूचियाँ है-
संघ सूची, राज्य सूची एवं समवर्ती सूची।
(i). संघ सूची- इस सूची में दिए गए विषय पर केंद्र सरकार कानून बनाती है। संविधान के लागू होने के समय इसमें संख्या 97 विषय थे, वर्तमान समय में इसमें 98 विषय है।
(ii). राज्य सूची- इस सूची में दिए गए विषय पर राज्य सरकार कानून बनाती है। राष्ट्रीय हित से संबंधित होने पर केंद्र सरकार भी कानून बना सकती है। संविधान के लागू होने के समय इसके अंतर्गत 66 विषय थे, वर्तमान समय में इसमें 62 विषय है।
(iii). समवर्ती सूची- इसके अंतर्गत दिए गए विषय पर केंद्र एवं राज्य दोनों सरकारें कानून बना सकती है। परंतु कानून के विषय समान होने पर केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून ही मान्य होता है। राज्य सरकार द्वारा बनाया गया कानून केंद्र सरकार के कानून बनाने के साथ ही समाप्त हो जाता है। संविधान के लागू होने के समय समवर्ती सूची में 47 विषय थे, वर्तमान समय में इसने 52 विषय है।
Note : समवर्ती सूची का प्रावधान जम्मू कश्मीर राज्य के संबंध में नहीं है। 8. आठवीं अनुसूची-
इसमें भारत की 22 भाषाओं का उल्लेख किया गया है। मूलरुप से आठवीं अनुसूची में 14 भाषाएं थी। 1967 ई. में सिंधी को और 1992 ई. में कोंकणी, मणिपुरी तथा नेपाली को आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया। 2004 ई. में मैथिली संथाली, डोगरी एवं बोड़ों को आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया। 9. नौवीं अनुसूची-
संविधान में यह अनुसूची प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम 1951 ई. के द्वारा जोडी गई। इसके अंतर्गत राज्य द्वारा सम्पत्ति के अधिग्रहण की विधियों का उल्लेख किया गया है। इस अनुसूची में सम्मिलित विषयों को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है। वर्तमान में इस अनुसूची में 284 अधिनियम है।
Note : अब तक यह मान्यता थी की संविधान की नौंवीं अनुसूची में सम्मिलित कानूनों की न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती। 11 जनवरी, 2007 के संविधान पीठ के एक निर्णय द्वारा यह स्थापित किया गया है की नौवी अनुसूची में सम्मिलित किसी भी कानून को इस आधार पर चुनौती दी जा सकती है कि वह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है तथा उच्चतम न्यायालय इन कानूनों की समीक्षा कर सकता है। 10.दसवीं अनुसूची-
RENVAT MAYLA, [03.08.16 00:22]
RENVATA RAM MAYLA, [03.08.16 00:17]
यह संविधान में 52वें संशोधन, 1985 के द्वारा जोड़ी गई है। इसमें दल-बदल से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख है। 11. ग्यारहवीं अनुसूची-
यह अनुसूची में 73वे संवैधानिक संसोधन, 1993 के द्वारा जोडी गई है इसमे पंचायतीराज संस्थाओं को कार्य करने के लिए 29 विषय प्रदान किए गए हैं। 12. बाहरवीं अनुसूची-
यह अनुसूची संविधान में 74वे संवैधानिक संसोधन, 1993 के द्वारा जोडी गई है इसमें शहरी क्षेत्र की स्थानीय स्वशासन संस्थाओं (नगरपालिका) को कार्य करने के लिए 18 विषय प्रदान किए गए हैं।
RENVATA RAM MAYLA, [03.08.16 00:18]
भारतीय संविधान : अनुसूचियाँ 👍👍👍👍👍