-मोदी ने कहा- "एससीओ हमारे राजनैतिक और आर्थिक सहयोग की मुख्य आधारशिला है। एससीओ देशों में हमारी सहभागिता के कई आयाम हैं। एनर्जी, एजुकेशन, एग्रीकल्चर, सिक्युरिटी, मिनरल, कैपेसिटी बिल्डिंग, डेवलपमेंट पार्टनरशिप, ट्रेड इसके अहम फैक्टर्स हैं। भारत को एससीओ की मेंबरशिप निश्चय ही हमारे सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। एससीओ देशों के साथ कनेक्टिविटी भारत की प्रायोरिटी है। हम इसका समर्थन भी करते हैं। हम चाहते हैं कि कनेक्टिविटी हमारी भावी पीढ़ियों और समाजों के बीच सहयोग का मार्ग प्रशस्त करे। इसके लिए कनेक्टिविटी इनीशिएटिव्स, प्रोजेक्ट की कामयाबी और मंजूरी के लिए सॉवरनिटी और क्षेत्रीय एकजुटता का आदर जरूरी है।"
- "आतंकवाद मानव अधिकारों और मानव मूल्यों के सबसे उल्लघंनों में से एक है। आतंकवाद और अतिवाद के खिलाफ संघर्ष एससीओ के सहयोग का अहम भाग है। मुद्दा चाहे रेडिकलाइजेशन का हो, आतंकवादियों की भर्ती का हो, उनकी ट्रेनिंग का हो या उनके फाइनेंस का। जब तक हम सभी देश मिलकर इस दिशा में कोशिशें नहीं करेंगे। तब तक प्रॉब्लम्स का हल नहीं निकलेगा। इस बारे में SCO की कोशिशें सराहनीय हैं। यह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को एक नई दिशा और मजबूती देगा।"
नवाज शरीफ ने दो बार लिया भारत का नाम
- मोदी के बाद पाकिस्तान पीएम नवाज शरीफ ने स्पीच दी। उन्होंने कहा- "पाकिस्तान और भारत के लिए आज अच्छा दिन है। मैं शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन के मेंबर्स का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने हमें मेंबर बनाया। पाकिस्तान SCO को अच्छी तरह जानता है। हमने कई समिट्स में हिस्सा लिया है। हमें टकराव और दुश्मनी के बिना आने वाली पीढ़ियों के लिए माहौल बनाना चाहिए। मैं भारत को भी बधाई देना चाहूंगा कि वह भी SCO का मेंबर बना है।"
- शरीफ ने कहा- "पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद से जूझ रहा है। हम आतंकवाद को काफी हद तक काबू करने में कामयाब रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम दुनिया को बदलने में योगदान देना चाहते हैं। SCO के जरिए एशिया में इकोनॉमिक डेवलपमेंट लाने, टेररिज्म कम करने और हथियारों की दौड़ कम करने में मदद मिलेगी।"
2001 में बना था SCO
- बता दें कि एससीओ एक पॉलिटिकल और सिक्युरिटी ग्रुप है। इसका हेडक्वार्टर बीजिंग में है। यह 2001 में बनाया गया था। चीन, रूस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान इसके परमानेंट मेंबर हैं।
- यह ऑर्गनाइजेशन खासतौर पर मेंबर कंट्रीज के बीच मिलिट्री को-ऑपरेशन के लिए बनाया गया है। इसमें खुफिया जानकारियों को साझा करना और सेंट्रल एशिया में आतंकवाद के खिलाफ अभियान चलाना शामिल है।
- फिलहाल अफगानिस्तान, बेलारूस, ईरान और मंगोलिया एससीओ में सुपरवाइजर कंट्री हैं।
- बता दें कि एससीओ एक पॉलिटिकल और सिक्युरिटी ग्रुप है। इसका हेडक्वार्टर बीजिंग में है। यह 2001 में बनाया गया था। चीन, रूस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान इसके परमानेंट मेंबर हैं।
- यह ऑर्गनाइजेशन खासतौर पर मेंबर कंट्रीज के बीच मिलिट्री को-ऑपरेशन के लिए बनाया गया है। इसमें खुफिया जानकारियों को साझा करना और सेंट्रल एशिया में आतंकवाद के खिलाफ अभियान चलाना शामिल है।
- फिलहाल अफगानिस्तान, बेलारूस, ईरान और मंगोलिया एससीओ में सुपरवाइजर कंट्री हैं।
भारत और पाकिस्तान को मेंबर बनाने केलिए दो साल पहले शुरू हुई थी प्रॉसेस
-SCO में 2005 से भारत ऑब्जर्वर की हैसियत से शामिल होता रहा है। 2014 में इसकी फुल मेंबरशिप के लिए अप्लाई किया था।
- 2015 में रूस के उफा में एससीओ समिट हुई थी। इसमें भारत-पाकिस्तान को परमानेंट मेंबर के तौर पर शामिल किए जाने का प्रपोजल पास किया गया था।
- 2016 में एसीओ समिट उज्बेकिस्तान के ताशकंद में हुई थी। इसमें भारत और पाकिस्तान के एससीओ में शामिल होने के लिए कमिटमेंट मेमोरेंडम पर साइन किए थे। चीन ने उम्मीद जताई है कि एससीओ का परमानेंट मेंबर बनने से भारत-पाक के बाइलेटरल रिलेशन भी सुधरेंगे।
मोदी-जिनपिंग की मुलाकात?
-शुक्रवार सुबह मोदी और चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग की भी मुलाकात हुई। दोनों लीडर्स के बीच चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) और न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) में भारत की मेंबरशिप को लेकर चर्चा हुई। दोनों देशों ने कई मुद्दों पर तनाव कम करने को लेकर बात की।
- हाल ही में भारत ने बीजिंग में OBOR समिट का बायकॉट किया था। भारत ने इसे अपनी सॉवेरनिटी का मामला बताया था।
- भारत पहले भी पाक की ग्वादर से चीन के शिनजियांग तक जाने वाले चीन-पाक कॉरिडोर का विरोध करता रहा है। भारत का आरोप है कि कॉरिडोर पाक के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के गिलगित-बाल्तिस्तान से होकर गुजरेगा। CPEC वन बेल्ट-वन रोड का ही हिस्सा है। चीन ने भारत से OBOR समिट में शामिल होने की अपील की भी थी।
- भारत पहले भी पाक की ग्वादर से चीन के शिनजियांग तक जाने वाले चीन-पाक कॉरिडोर का विरोध करता रहा है। भारत का आरोप है कि कॉरिडोर पाक के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के गिलगित-बाल्तिस्तान से होकर गुजरेगा। CPEC वन बेल्ट-वन रोड का ही हिस्सा है। चीन ने भारत से OBOR समिट में शामिल होने की अपील की भी थी।